पांढुर्ना, मध्य प्रदेश — 21 जुलाई, 2025 सीएम राइज स्कूल योजना के तहत पढ़ने वाले छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। प्रमुख शिकायत यह थी कि नियमित छात्रों के परिणाम प्राइवेट छात्रों की तरह घोषित किए जा रहे थे।

तत्पर प्रयासों से यह मामला राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और अनुसूचित जनजाति आयोग (ST Commission) तक पहुँचा। दोनों संस्थाओं ने इस विषय में मध्य प्रदेश शासन, पांढुर्ना कलेक्टर और DPI आयुक्त को नोटिस जारी कर 7 दिन में जांच रिपोर्ट की मांग की।

छात्रों और अभिभावकों को न्याय की उम्मीद जागी है और उन्होंने जिम्मेदार संस्थाओं के प्रति आभार जताया है। इस निर्णय का लाभ न सिर्फ पांढुर्ना बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के छात्रों को मिलने की संभावना है। इस सभी कार्रवाइयों में पूर्व न्यायाधीश प्रकाश भाऊ उइके की सक्रियता की चर्चा पूरे जिले में है।

कल की सुनवाई रही महत्वपूर्ण

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, कल पांढुर्ना-छिंदवाड़ा प्रशासन के प्रतिनिधि दिल्ली में ST आयोग के समक्ष पेश हुए। जबकि आयोग ने स्पष्ट रूप से DPI आयुक्त को उपस्थित रहने को कहा था, वे किसी कारणवश अनुपस्थित रहे। DEO भी बीमारी के चलते नहीं पहुँच सके।

CM Rise स्कूल की प्राचार्या सहित दो अधिकारी आयोग के सामने उपस्थित हुए, लेकिन उन्हें निर्णय की शक्तियाँ न होने के कारण आयोग ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। हालांकि, उनकी रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखा गया है। आयोग ने DPI आयुक्त को अब 18 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।

पिछली घटनाओं का सारांश:

  • ST आयोग ने 7 दिनों में जांच का आदेश दिया था।
  • NCPCR ने भी मामले को गंभीर मानते हुए हस्तक्षेप किया।
  • छात्रों को प्राइवेट कैटेगरी में डालने की वजह से उनका भविष्य खतरे में था।
  • छात्रों और पालकों द्वारा शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।